वो 15 मिनट तय करेगी चंद्रयान 2 मिशन की कामयाबी, इन 15 मिनट पर टिकी होगी दुनिया की नजर!


15 जुलाई को रवाना हो रहा भारत का चंद्रयान 2 मिशन पूरी तरह भारतीय तकनीक से चंद्र सतह पर सॉफ्ट लैडिंग करवाने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) का चंद्रयान-2 मिशन 15 जुलाई को तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से लॉन्च होगा। इसके 6 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने का अनुमान है। 

इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा है चंद्रमा की सतह पर सफल और सुरक्षित लैंडिंग कराना। चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह से 30 किमी की ऊंचाई से नीचे आएगा। उसे चंद्रमा की सतह पर आने में करीब 15 मिनट लगेंगे।

चंद्रमा पर चंद्रयान-2 को रोवर और लैंडर की सहज लैंडिंग सबसे बड़ी चुनौती है। चांद की कक्षा से दक्षिणी ध्रुव पर रोवर और लैंडर को आराम से उतारने के लिए प्रोपल्शन सिस्टम और ऑनबोर्ड कंप्यूटर का काम मुख्य होगा। ये सभी काम खुद-ब-खुद होंगे।

यह 15 मिनट इसरो के लिए जीवन-मरण का प्रश्न होगा, क्योंकि मिशन की कामयाबी इसी 15 मिनट पर टिकी होगी। लॉन्च के बाद अगले 16 दिनों में चंद्रयान-2 पृथ्वी के चारों तरफ 5 बार कक्षा बदलेगा। इसके बाद 6 सितंबर को चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्र्रुव के पास लैंडिंग होगी।

जानिए रोवर और लैंडर का क्या काम है....
रोवर
प्रज्ञान यानी बुद्धिमत्ता, चंद्रयान का चंद्रमा पर उतरने जा रहा यह 27 किलो का रोवर मौके पर ही प्रयोग करेगा। इसमें 500 मीटर तक चलने की क्षमता है। इसके लिए यह सौर ऊर्जा का उपयोग करेगा। 27 किलो का यह रोवर 50 वॉट बिजली पैदा करेगा, जिसका उपयोग चंद्रमा पर मिले तत्वों का एक्सरे और लेजर से विश्लेषण करेगा।

लैंडर 
लैंडर जहां उतरेगा उसी जगह पर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते है या नहीं। वहां तापमान और चंद्रमा का घनत्व कितना है। रोवर चांद के सतह की रासायनिक जांच करेगा।
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