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विंग कमांडर बनने का जुनून है तो यहां जानिए पूरी जानकारी


भारतीय वायु सेना में काम करना एक सम्मान और चुनौती से भरा काम होता है। एयरफोर्स में पायलट बनने के लिए मेहनत, लगन, ईमानदारी और समर्पण के साथ ही देश के प्रति अगाध प्रेम होना भी अनिवार्य है।

भारतीय वायुसेना में जॉइन करने के लिए 12वीं कक्षा फिजिक्स व मैथ विषयों के साथ पास होनी चाहिए। साथ ही इसके लिए उम्र सीमा 16 साल से 19 वर्ष है। इसके लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी यानी NDA ज्वाइन कर सकते हैं। साथ ही एयर फोर्स ज्वाइन करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए। यदि 12वीं करने के बाद एनडीए में नहीं जा सके तो ग्रेजुएशन के बाद कम्बाइन डिफेंस सर्विस एग्जाम यानी CDSE के जरिए भी सेना ज्वाइन किया जा सकता है। CDSE  में हिस्सा लेने के लिए आयु 19 से 23 वर्ष बीच होनी चाहिए। साथ ही इस क्षेत्र में जाने के लिए अविवाहित होना भी अनिवार्य है।

शारीरिक मानक
1. किसी भी रोग / विकलांगता, से मुक्त होने चाहिए। किसी भी प्रकार का शारीरिक दोष या अधिक वजन नहीं होना चाहिए।
2. सीना के विस्तार की न्यूनतम सीमा 5 सेमी होना चाहिए।
3. हड्डियों और शरीर के जोड़ों का कोई रोग नहीं होना चाहिए।
4. कान, नाक और गला में किसी प्रकार की बीमारी नहीं होनी चाहिए।
5. विजन परीक्षण में दूरदृष्टि अच्छी होनी चाहिए।

कैसे मिलता है प्रोमोशन?
एक बार जब पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में सम्मिलित हो जाने के बाद फिर क्षमता और सेवाओं के अनुभव के अनुसार, फ्लाइंग ऑफिसर, एविएशन का कप्तान, दस्ते का नेता, विंग कमांडर, हवाई बेड़े का कर्नल, हवाई बेड़ा का जनरल, एयर वाइस मार्शल, एयर मार्शल, एयर चीफ मार्शल तक प्रोमोट किया जाता है।

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